आज में अपनी जिंदगी जीने के तरीके और फायदे।

जिंदगी जीने के तरीके कई हो सकते हैं। लेकिन हममें से ज़्यादातर लोग जीवन को समझ पाने में बहुत देर लगा देते हैं। हम खुद में ही उलझे रहते हैं। और दुनिया भर की चिंता में अपना समय गुज़ार देते हैं। इस वजह से हमारा जीवन ज़रूरत से ज़्यादा मुश्किल लगने लगता है। हम अपने अतीत में खोकर अपने आज को भूल जाते हैं।

ज़िंदगी के कई इस तरह के पहलुओं को हमें देखना चाहिए। ऐसा करने से ज़िंदगी में आने वाली हर दिक्कत को हल करने का ज़रिया मिल जाता है। हम ज़िंदगी में जिन दिक्कतों का सामना करते हैं उनमें से ज़्यादातर हम खुद ही बनाते हैं और इन दिक्कतों से परेशान होकर हम अपनी ज़िंदगी से खुशी बहुत दूर कर देते हैं। सही जिंदगी जीने के तरीके समझने के बाद हम इस समस्या से भी छुटकारा पा सकते हैं।

आज में जिंदगी जीने के तरीके

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१. सोच में बदलाव

अपनी सोच में थोड़ा बदलाव लाने से बहुत से लोगो को जिंदगी जीने के तरीके समझने का और चीजों को देखने का सही नज़रिया पता चल जाता है। सबसे पहली चीज़ जो हमें एक अच्छी ज़िंदगी हासिल करने के सफर में करनी होती है वो है, आज पर अपना पूरा ध्यान लगाना और कल को सिर्फ एक अनुभव के रूप में ध्यान रखना।

२. बीते समय से सीख

हम जिसे आज का नाम देते हैं असल में वह उन पलों का संग्रह होता है जो गुज़र चूकें हैं और भविष्य हम अपने आज से ही बनाते हैं। बीते समय से सीखना और आने वाले समय को बेहतर बनाने की सोच रखना सही है लेकिन इस सबसे ज़्यादा ध्यान आज पर देना चाहिए। ऐसा करने से हम ज़िंदगी को सुधार सकते हैं और इसमें खुशी ला सकते हैं।

३. दिक्कत और परिस्थितियाँ

हम अक्सर अपनी ज़िंदगी की दिक्कतों को परिस्थितियों से जोड़ देते हैं। लेकिन, असल में हमारी दिक्कतों की जड़ अक्सर हमारा ईगो या अहंकार होता है। ज़िंदगी में दर्द या दिक्कतें केवल हमारे मन के विचारों और हमारे कामों से जुड़ी होती हैं जिसे हम चाहकर भी नहीं बदल सकते। और यही वो वजह ही जो हमारे जीवन की खुशी कम कर देती है।

४. अहंकार की जगह नही

किसी भी व्यक्ति को यह समझना बहुत ज़रूरी है कि एक खुशहाल ज़िंदगी में अहंकार की कोई जगह नही होती। अगर हम अपने दिमाग़ में अहंकार को जगह देंगे तो हम बेवजह ही परिस्थितियों को मुश्किल बना देंगे। साथ ही, हमारा दिमाग़ छोटी चीजों में छिपी खुशी को नहीं देख पाएगा।

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५. दिमाग़ पर काबू और संतुष्टि

हम ज़िंदगी में दर्द का एहसास तभी करते हैं जब हम किसी बात को लेकर असंतुष्ट होते हैं या किसी बात को हम बदलने की ताकत नहीं रखते। यही भावना बढ़ी बनकर जब हमारे दिमाग़ पर काबू कर लेती है तो यह हमारी ज़िंदगी में नकारात्मकता लाती है। क्योंकि हम ज़िंदगी के कल में ही खोये रहते हैं और भविष्य की चिंता में लग जाते हैं। इस सब सोच के बावजूद भी, यह सच नहीं बदलता कि हम सिर्फ आज में ही रह सकते हैं और हमारे पास ग़लत चीजों को सही करने या फिर असंतुष्टि की चीजों को बदलने की ताकत या योग्यता नहीं होती।

६. छोटी खुशियाँ

ज़िंदगी छोटी खुशियों से ही खुशहाल बनती है। अगर हम आज की बातों में खुशी नहीं ढूँढेंगे और बीते हुये कल की बातों पर दुखी होंगे तो इससे कुछ हासिल नहीं होगा। अपने अहंकार को हमें अपनी ज़िंदगी में कभी जगह नहीं देनी चाहिए क्योंकि ऐसा करना सिर्फ चीजों को मुश्किल ही बनाएगा।

७. बेवजह की तकलीफ़

अगर हमें अपनी ज़िंदगी में सफलता हासिल करनी है तो हमें अपनी ज़िंदगी से बेवजह की तकलीफ़ों को हटाना होगा। अपनी ज़िंदगी में सफल होने और अपनी उम्मीद से ज़्यादा तरक्की हासिल करने के लिए हमें दिक्कतों को हटाना होगा और ये तभी होगा जब हम अपनी सोच को बदलेंगे। हमें अपने दिमाग़ को समझना चाहिएँ, अपनी कमजोरियों और ग़लतियों को समझना चाहिएँ और इसमें सुधार करना चाहिए।

८. हमारी सोच में बदलाव

कभी कभी दिमाग़ भी कई मुसीबतों की जड़ होता है। कभी कभी हम किसी छोटी सी बात को ही बहुत बड़ा समझ लेते हैं। जैसे, अगर कोई प्रोग्राम एक व्यक्ति को पसंद है लेकिन दूसरे व्यक्ति की ऐसी राय नहीं है और ऐसे में कोई टिप्पणी करने पर चीज़ें बहस में बादल जाती हैं। छोटे मुद्दो पर बड़ी बहस होने में देर नहीं लगती और इसका कारण है हमारा अहंकार और हमारा दिमाग़ जो चीजों को हमारी सोच के हिसाब से ही समझता और मानता है।

आज में ज़िंदगी जीने के फायदे

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१. ठहराव और बदलाव

जैसे कहा जाता है कि दिमाग़ पानी की तरह है, यह ठहरा हुआ हो तो इसमें साफ दिखाई दे सकता है लेकिन अगर इसमें हलचल हो रही हो तो हम इसमें कुछ भी नहीं देख सकते। अगर हम अपनी ज़िंदगी आज में जीना शुरू कर देंगे तो हमें अपनी ज़िंदगी में ठहराव और बदलाव दिखाई देने लगेगा। कई बातें जो हमें पहले समझ नहीं आती होंगी उन्हें हम साफ तौर पर समझ पाएंगे।

२. चिंता से विकार

ज़िंदगी में चिंता कई विकारों को जन्म दे देती है। यह समझना ज़रूरी है कि हमारी ज़िंदगी में अगर हम खुश रहेंगे तो हम कई बड़ी बीमारियों को खुदसे दूर रख सकते हैं। जैसे, मानसिक रोग, अनिद्रा, सिर में दर्द, भय, दिल का दौरा, और कैंसर आदि। चिंता करने से हमारे स्वास्थ पर और भी कई विपरीत और प्राणघातक प्रभाव होते हैं इसीलिए चिंता ना करने से हमारा स्वास्थ बिना किसी दवा के बेहतर होने लगता है।

३. चिंता से व्यवहार परिवर्तन

जब हम बहुत चिंता करते हैं तो इसके प्रभाव हमारे व्यवहार में परिवर्तन ला देते हैं। चिंता करने से हमारे व्यवहार में नकारात्मक परिवर्तन आते हैं और चिंता ना करने से सकारात्मक। अगर हम अपने आज को स्वीकारकर आगे बढ़ते हैं तो हमें चिंता से मुक्ति मिल जाती है और हमारा व्यवहार भी स्वतः ही सकारात्मक हो जाता है।

४. पछतावो की ज़िंदगी

कई बार लोग चिंता और अतीत के पछतावों की वजह से अपनी आज की ज़िंदगी बोझिल बना लेते हैं। बीते हुये कल के बोझ हमें डरावने सपनों और प्रतिदिन चलने वाली बेचैनी दे जाते हैं। आज को स्वीकारने और खुद को आगे बढ्ने का मौका देने से हम खुद को इन बोझिल पलों और पछतावों से दूर कर सकते हैं। इससे हमारी ज़िंदगी पर भी अच्छा प्रभाव पड़ेगा और हम अपनी ज़िंदगी में ज़्यादा बेहतरी की संभावना देख सकेंगे।

५. भावनाओं पर काबू

कई बार हम अपनी चिंताओं और दिक्कतों की वजह से अपनी भावनाओं पर काबू खो देते हैं। कई भावनाएँ ऐसी होती हैं जिनपर काबू रखकर ही एक सफल और सुखी जीवन व्यतीत किया जा सकता है।

aware of myself जिंदगी जीने के तरीके

जैसे:

भावना कारण / लक्षण उपाय / पथप्रदर्शन

भय

हमें भय अपनी दिमाग़ की कमजोरी से लगता है।

हमें अपने मस्तिष्क को मजबूत बनाना चाहिए और योग इसका सबसे बेहतर उपाय है।

क्रोध

हमें बहुत ज़्यादा क्रोध अपनी मस्तिष्क की बेचैनी की वजह से आता है।

हमें क्रोध पर काबू रखना सीखना होगा और अपने मस्तिष्क को दूसरी तरफ व्यस्त करने की कोशिश करनी होगी।

तनाव

जब हम बहुत ज़्यादा सोच-विचार करते हैं तो यह तनाव बन जाता है।

हमें तनाव को दूर रखने के लिए अपनी सोच को सरल और सहज बनाना होगा।

 

दुःख

कुछ चीजों में दुख सामन्य है लेकिन अगर ग़ैर ज़रूरी चीजों पर भी गहन दुख या खुशी की भावना महसूस हो तो यह ग़लत है।

खुदपर काबू रखने के लिए हमें अपनी भावनाओं को समझना और चीजों पर प्रतिकृया करने से पहले उन्हें जानना चाहिए।

पीड़ा

कई बार मानसिक तनाव भी पीड़ा का कारण बन जाता है।

इस तरह की पीड़ा से निजात पाने के लिए सोच-विचार कम करें और अपना मस्तिष्क शांत करें।

उदासीनता, अवसाद या निराशा

जब हम हर छोटी-छोटी विफलता पर या हमारी सोच के मुताबिक चीज़ें ना होने पर उदास हो जाएँ तो यह प्राकृतिक भावना नहीं है।

हमें उदासीनता को दूर करने के लिए आशा और भरोसे का सहारा लेना चाहिए।

झुंझलाहट

जब हमें सिर्फ अपनी ही बात सही लगे और दूसरे की हर छोटी-छोटी बात पर झुंझलाहट हो तो यह भी प्राकृतिक भावना नहीं मानी जाएगी।

अपनी प्रतिकृया देने से पहले सोचें और दूसरों की बात पर अपनी राय रखने से पहले आप जो बात कहने वाले हैं उसे एक श्रोता की रूप में देखें और परखें।

स्नेह या कामोत्तेजना

जब हम किसी वस्तु, व्यक्ति या जगह के प्रति हद से ज़्यादा प्रेम या कामोत्तेजना की भावना महसूस करें तो हमें समझ जाना चाहिए कि यह एक प्राकृतिक भावना नहीं है।

स्नेह या कामोत्तेजना एक कोमल जज़्बात होने चाहिएँ जिसमें समय की और व्यक्ति की मर्यादा रखना हमें कभी नहीं भूलना चाहिए ताकि इस भावना का आपको भी सकारात्मक जवाब मिल सके।

श्रद्धा या मान्यता

जब हम किसी वस्तु, व्यक्ति, भगवान या जगह के प्रति हद से ज़्यादा श्रद्धा या मान्यता की भावना को महसूस करने लगें तो हमें समझ जाना चाहिए कि यह एक प्राकृतिक भावना नहीं है।

जैसे, क्योंकि भगवान हमारे दिल में बसे हैं इसीलिए इस बहाने से अपने परिजनों को समय ना देना ग़लत है। उसी तरह, किसी भी विषय में हद से ज़्यादा श्रद्धा या मान्यता को हमें समझना चाहिए और हर विषय की मर्यादा को समझकर उसका पालन करना चाहिए।

ईर्ष्या, घृणा या कुंठा

जब हमें किसी चीज़, स्थिति, व्यक्ति या विषय से ईर्ष्या, घृणा या कुंठा की प्रबल भावना महसूस हो तो इसे हमें समझ लेना चाहिए कि हमारे दिमाग़ को आराम की ज़रूरत है।

जब हमारा दिमाग़ थक जाता है या चिंताओं से घिरकर काम आशा छोड़ देता है तभी हमारे मन में ईर्ष्या, घृणा या कुंठा पैदा होती है इसीलिए हमें खुदको चिंता से जितना हो सके दूर ही रखना चाहिए।

अपराध, दुश्मनी या आतंक

अपराध, दुश्मनी या आतंक के बारे में सोच रखना या ऐसे कार्य करना हमारे मस्तिष्क में मानसिक विकार को दर्शाता है।

जब हम अपराध, दुश्मनी या आतंक के बारे में सोच रखने लगें और जब हमारा मस्तिष्क हमें ग़लत को सही बताने लगे तो हमें समझ जाना चाहिए कि हमारा मस्तिष्क चिंता झेलकर हार गया है और अब यह मानसिक विकार का रूप ले रहा है। ऐसे में हमें तुरंत मानसिक चिकित्सक पर जाना चाहिए और योग करना शुरू कर देना चाहिए।

जिंदगी जीने के तरीके हमें ना सिर्फ हमारी ज़िंदगी में खुशहाली लाते हैं, यह हमारे भविष्य को भी सुधार सकते हैं।

जीवन जीने पर मार्गदर्शन स्त्रोत:

ओशो : मैं सहज जीवन जीना पसंद करता हूँ।

योग से जीवन में खुशी आती है

Wikipedia – Positive psychology

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